6 महीने का बच्चा क्या करता है?HealthPlanet

Posted on Sat 4th Feb 2023 : 10:48

जैसा कि आप जान ही चुके होंगे कि शिशु जन्म के एक-दो महीने बाद से ही कुछ न कुछ नया सीखने लगते हैं। उनका सिर्फ शारीरिक ही नहीं, बल्कि मानसिक और यहां तक कि भावनात्मक विकास भी होने लगता है। 6 महीने के शिशु का विकास तो पहले के कुछ महीनों की तुलना में अधिक होने लगता है और वह कई और नई चीजें जानने लगता है। बता दें कि ये विकास एक औसतन अनुमान के तौर पर है। हर बच्चे की विकास क्षमता अलग-अलग हो सकती है। यह संभव हो सकता है कि आपका बच्चा 6 महीने में विकास की सही क्षमता को प्राप्त न कर सके। आमतौर पर 1-2 महीने की भिन्नता देखी जा सकती है। वहीं, अगर 2 महीने से अधिक देरी हो जाती है, तो बाल रोग विशेषज्ञ से सलाह लेना जरूरी हो सकता है। नीचे विस्तार से जानिए बच्चे से विकास से जुड़ी जानकारी।


चीजों को मुंह में लेना – छठे महीने में शिशु सामने पड़ी चीजों को मुंह में लेना सीखने लगते हैं। इसलिए, इस दौरान माता-पिता को थोड़ा ज्यादा सावधान रहना चाहिए और शिशु पर हर वक्त ध्यान रखना चाहिए, ताकि वो नीचे पड़ी चीजों को या खिलौनों को मुंह में न ले सकें।

आवाजों की नकल करना – जब शिशु 6 महीने का हो जाता है, तो वह अक्सर आवाजों को सुनकर उसकी नकल उतारने की कोशिश करने लगता है। कई बार तो वह अपने आस-पास लोगों को देखकर भी उनकी नकल उतारने की कोशिश करता है

नाम सुनकर प्रतिक्रिया देना – 6 महीने के बच्चे अपने नाम को भी समझने और पहचानने लगते हैं। जब कोई उन्हें उनके नाम से पुकारता है, तो वो प्रतिक्रिया देते हैं

चीजों को लेकर उत्सुक होना – इस उम्र में शिशु चीजों को लेकर ज्यादा जिज्ञासु होने लगते हैं। उनके सामने अगर कुछ रखा हो, तो वो उन्हें छूने और पकड़ने की कोशिश करते हैं। साथ ही आस-पास रखी चीजों को देखने लगते हैं ।

आवाजें निकालने लगते हैं – 6 महीने के शिशु तरह-तरह की ध्वनियां निकालने लगते हैं साथ ही मां, डाडा, बाबा जैसे शब्द बोलने की कोशिश करने लगते हैं। इतना ही नहीं आइने में देखकर या खिलौनों की आवाज सुनकर या उनके साथ खेलते हुए वो अपनी भाषा में गाने की भी कोशिश करते हैं या तरह-तरह की आवाजें निकालने लगते हैं। यहां तक कि खुद की आवाज सुनकर भी खुश हो जाते हैं। छह माह के शिशु अपनी खुशी और दुख को प्रकट करने के लिए भी आवाजें निकालते हैं। वो रोने या चिल्लाने लगते हैं, ताकि लोगों का ध्यान उनकी तरफ आकर्षित हो।

चीजों को पकड़ना और लोगों को देना – इस उम्र में शिशु न सिर्फ चीजों को पकड़ना सीखने लगते हैं, बल्कि अगर उनके हाथ में पकड़ी हुई चीज को मांगा जाए, तो वो देना भी सीखने लगते हैं। इतना ही नहीं, अगर उनके हाथ में पकड़ी हुई चीज गिर जाए, तो उन्हें पता होता है कि उसे उठाना भी है।

शारीरिक विकास
रंगों में फर्क करना – 6 महीने में शिशु की आंखों में भी बदलाव होने लगता है यानी उनकी दृष्टि तेज होने लगती है। वो दो रंगों के बीच अंतर समझने लगते हैं और उनके सामने अगर कोई रंग-बिरंगी किताब या खिलौने हों, तो वो लगातार कई देर तक उनको देखना पसंद करते हैं

आंखों और हाथ के बीच तालमेल – छठे महीने में शिशु के आंख और हाथ का तालमेल बैठने लगता है। वो जिन चीजों को देखते हैं, उन्हें पकड़ने की भी कोशिश करते हैं, भले ही वो वस्तु न हिले।

सभी उंगलियों के साथ वस्तुओं को पकड़ना – छठे महीने में शिशु छोटी वस्तुओं को अपनी सारी उंगलियों के साथ पकड़ना सीख जाते हैं। अगर आपका शिशु फॉर्मूला दूध पीता है, तो आप गौर करेंगे कि आपका शिशु धीरे-धीरे बोतल पकड़ना शुरू कर देता है ।

बिना सहारे के बैठना – 6 महीने में शिशु की मांसपेशियां और हड्डियां मजबूत होने लगती है और वो बिना किसी सहारे के बैठना सीखने लगते हैं। यहां तक कि वो सिर को सीधा करना भी सीखने लगते हैं और जब वो पेट के बल लेटते हैं या किसी के गोद में जाते हैं, तो सिर को सीधा रखने की कोशिश करने लगते हैं और गर्दन को इधर-उधर घुमाकर आस-पास की चीजों को भी देखने लगते हैं ।

दांत आना – छठे महीने में शिशु को दांत आने शुरू हो जाते हैं , इसी कारण उनके मसूड़ों में सिहरन होनी शुरू होती है और वो चीजों को काटना भी शुरू करने लगते हैं। वहीं, एक सामान्य बच्चे के दांत निकलने में 13 महीने तक की देरी हो सकती है। अगर आपके बच्चे के दांत 6 महीने में नहीं निकलते हैं, तो चिंता की बात नहीं है। शिशु के दांत निकलने के लिए आप और 6 से 7 महीने तक का इंतजार कर सकते हैं।

हल्के-फुल्के ठोस आहार के लिए तैयार – जैसा कि हमने ऊपर बताया कि छठे महीने में शिशु को दांत आने लगते हैं, लेकिन इसी के साथ उसकी पाचन शक्ति भी पहले के मुकाबले ज्यादा मजबूत हो जाती है। इसलिए, शिशु को मां के दूध के साथ-साथ ठोस आहार देने की भी जरूरत होती है। ऐसे में जब कोई उनके सामने कुछ खाता है, तो वो भी खाने के लिए उत्सुकता दिखाने लगते हैं । इसके अलावा, अगर 6 महीने में बच्चे के दांत न आए हों, तो भी उन्हें थोड़ा-बहुत ठोस आहार दिया जा सकता है। 6 महीने से बच्चे को मां के दूध के साथ-साथ पूरक आहार की भी जरूरत होती है क्योंकि इनसे उन्हें पोषण मिलता है।

ध्यान रहे आपका शिशु हल्के-फुल्के ठोस आहार के लिए तब ही तैयार होगा, जब वो अपने गर्दन और सिर को सही तरीके से कंट्रोल कर बैठना सीखने लगे। हालांकि, शिशु को ठोस आहार देने से पहले अपने डॉक्टर से भी एक बार जरूर बात करें और शिशु को क्या खिलाना है और क्या नहीं उसका एक आहार चार्ट भी लें ।
सामाजिक और भावनात्मक विकास

परिचित लोगों के पास और अजनबी से दूरी – 6 महीने के बच्चे अपने आस-पास रहने वाले लोगों को पहचानने लगते हैं। अपने माता-पिता और घर के अन्य सदस्यों को दूर से ही पहचानने लगते हैं, लेकिन वहीं किसी अनजान व्यक्ति को देखकर घबरा जाते हैं। उन्हें देखकर डर जाते हैं और रोने लगते हैं ।

माता-पिता के साथ खेलना – शिशु माता-पिता के साथ खेलना और वक्त बिताना पसंद करने लगते हैं । कई बच्चे तो अगर पूरे दिन के बाद अपने पिता को देखते हैं, तो खिलखिलाकर खेलने के लिए इशारा भी करते हैं।

दूसरों के भाव पर प्रतिक्रिया देना – 6 महीने के बच्चे दूसरों के हाव-भाव पर भी प्रतिक्रिया देना सीखने लगते हैं। अगर उनके सामने कोई खुश है, तो वो भी अपने हाव-भाव से खुशी व्यक्त करेंगेलेकिन अगर कोई दुखी है खासकर वो जिन्हें वो पहचानते हैं, तो वो भी दुखी हो जाते हैं और रोने लगते हैं। अगर उनके पास बैठा कोई बच्चा रो रहा हो, तो वो भी रोना शुरू कर सकते हैं।

आगे हम आपको 6 महीने के शिशु को लगाए जाने वाले टीकों की जानकारी देंगे।
6 महीने के बच्चे को कौन-कौन से टीके लगने चाहिए?

अगर छठे महीने में बच्चे की देखभाल की बात करें, तो इसमें शिशु का टीकाकरण होना जरूरी है। 6 महीने के शिशु का विकास सही से हो, उसके लिए उन्हें सही वक्त पर सही टीकाकरण कराना बहुत ही आवश्यक है, ताकि बीमारियों से उनका बचाव हो सके। इसलिए, नीचे हम आपको 6 महीने के बच्चे को कौन-कौन से टीके लगवाने चाहिए, उसके बारे में बता रहे हैं।

6 महीने के बच्चे के लिए कितना दूध आवश्यक है?
शिशु जैसे-जैसे बड़ा होता है, उसकी भूख और खाने-पीने की आदतें भी बदलने लगती हैं। 6 महीने के बच्चे की भी दूध पीने की आदतों में बदलाव होने लगता है। इसलिए, नीचे हम आपको 6 महीने के बच्चे के लिए कितना दूध आवश्यक है, उस बारे में जानकारी दे रहे हैं।

मां का दूध – यह तो लगभग सभी जानते हैं कि 6 महीने तक शिशु के लिए मां का दूध ही जरूरी होता है, लेकिन छठे महीने में शिशु को हल्के-फुल्के ठोस आहार भी देना जरूरी होता है। इस दौरान, शिशु को औसतन 700 से 800 एमएल प्रतिदिन मां के दूध की जरूरत होती है । कुछ शिशु इससे ज्यादा या कम दूध भी पी सकते हैं। यह पूरी तरह से उसकी भूख व गतिविधियों पर निर्भर करता है।



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